श्रावण मास (सावन) और भगवान शिव – महत्व, पूजा विधि और व्रत नियम - Dwarpal Sikar

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08 फ़रवरी 2026

श्रावण मास (सावन) और भगवान शिव – महत्व, पूजा विधि और व्रत नियम

 

श्रावण मास (सावन) और भगवान शिव – महत्व, पूजा विधि और व्रत नियम

श्रावण मास, जिसे आम भाषा में सावन कहा जाता है, हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। यह पूरा महीना भगवान शिव की आराधना को समर्पित होता है। इस दौरान करोड़ों श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिव पूजा करते हैं और मंत्र जाप करके भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

इस लेख में हम श्रावण मास का महत्व, भगवान शिव से इसका संबंध, सावन के व्रत नियम, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ के बारे में विस्तार से जानेंगे।


श्रावण (सावन) मास क्या है?

श्रावण मास हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना होता है, जो सामान्यतः जुलाई–अगस्त के बीच आता है। इस महीने का नाम श्रवण नक्षत्र के नाम पर रखा गया है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास में की गई भगवान शिव की पूजा शीघ्र फलदायी होती है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

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श्रावण मास भगवान शिव को क्यों समर्पित है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय एक भयानक विष हलाहल निकला था। संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया और उसे अपने कंठ में धारण किया, जिससे वे नीलकंठ कहलाए।

ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव को शीतलता प्राप्त होती है। इसलिए इस महीने शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है।



सावन सोमवार का महत्व

श्रावण मास के सभी सोमवारों को सावन सोमवार कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कई भक्त इस दिन व्रत रखते हैं।

सावन सोमवार व्रत के लाभ

  • मनोकामनाओं की पूर्ति

  • वैवाहिक जीवन में सुख-शांति

  • मानसिक शांति और सकारात्मकता

  • बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति

अविवाहित कन्याएँ अच्छे वर की प्राप्ति के लिए सावन सोमवार का व्रत रखती हैं।


श्रावण मास की पूजा विधि

श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करने की सरल विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें

  2. शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद अर्पित करें

  3. बेलपत्र, पुष्प और फल चढ़ाएँ

  4. ॐ नमः शिवाय मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें

  5. शिव आरती करें और श्रद्धा से प्रार्थना करें

यह पूजा घर पर या नजदीकी शिव मंदिर में की जा सकती है।


सावन व्रत के नियम

सावन में व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:

  • दिन में एक बार सात्विक भोजन करें या फलाहार लें

  • मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से परहेज करें

  • मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें

  • अधिक समय भगवान शिव के ध्यान और भक्ति में लगाएँ

व्रत से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति होती है।

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श्रावण मास के क्षेत्रीय पर्व

भारत के विभिन्न राज्यों में श्रावण मास अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है:

  • उत्तर भारत: कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक

  • महाराष्ट्र: श्रावण सोमवार और मंगला गौरी व्रत

  • दक्षिण भारत: विशेष अभिषेक और मंदिर अनुष्ठान

  • नेपाल: पशुपतिनाथ मंदिर में विशेष आयोजन


सावन में भगवान शिव की पूजा के आध्यात्मिक लाभ

श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना से:

  • नकारात्मक कर्मों का नाश होता है

  • आत्मिक शांति प्राप्त होती है

  • जीवन में संतुलन और संयम आता है

  • परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है

यह महीना आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर देता है।


निष्कर्ष

श्रावण मास (सावन) भगवान शिव की भक्ति का पावन समय है। इस महीने श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ की गई पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

सच्चे मन से किया गया छोटा-सा पूजन भी भगवान शिव को प्रसन्न करता है। सावन हमें धर्म, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।


हर हर महादेव!