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द शौशैंक रिडम्पशन (1994) - जीवन के हर पहलू को छूती हुई घनघोर निराशा से लेकर आजादी के चमकते सूरज का सफर

यदि आप किसी शानदार फिल्म देखने के लिए तलाश में है तो हाॅलीवुड की इस फिल्म को देखना कतई न भुले रिलीज दिनांक - 20 अगस्त 1994 (आयरलैंड), निर्देशक - फ्राङ्‌क डाराबोन्ट, कहानीकार - स्टीफन किंग, पटकथा - स्टीफन किंग, फ्राङ्‌क डाराबोन्ट, नामांकन - अकेडमी पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ पिक्चर सन् 1994 में बनी फिल्म ‘‘द शौशैंक रिडम्पशन’’ हॉलीवुड सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। यह फिल्म जीवन के गहरे अर्थो से परिचित करवाती है। इस फिल्म को आपको एक बार जरूर देखनी ही चाहिए। कलाकार टिम रॉबिन्स और मॉर्गन फ्रीमन की बेहतरीन एक्टिंग इसकी कहानी में जान फुंक देती है। फिल्म की कहानी एक बैंकर की जो किसी वजह से अपनी पत्नी के हत्या के आरोप में अजीवन उम्रकैद की सजा के साथ जेल भेज दिया जाता है। इसके बाद फिल्म की कहानी में एक आजाद और स्वछंद इंसान होता है, जो कि अपनी जिंदगी के हर फैसले खुद लेता रहा है और अचानक एक ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है जिसमें उसकी हर चीज नियंत्रित होती है। यहां तक कि उसका उठना बैठना सोना खाना पीना नियन्त्रित होता है। वह अपनी मर्जी से कुछ भी नही कर पाता है। फिल्म की शुरुआत में फिल्म के ...

खांसी-जुकाम, सर्दी से बचने के घरेलू नुस्खे

खांसी-जुकाम हर बदलते मौसम के साथ आने वाली समस्या है। खांसी बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन, एलर्जी, साइनस इन्फेक्शन या ठण्ड के कारण हो सकती है लेकिन हमारे देश में हर परेशानी के लिए लोग डॉक्टरों के पास नहीं जाते। हमारी ही किचन में कई ऐसे नुस्खे छिपे होते हैं जिनसे खांसी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी बीमारियां फुर्र हो जाती हैं। तो आइए हम आपको बताते हैं खांसी-जुकाम में रामबाण ये 16 घरेलू नुस्खे... आधा चम्मच शहद में एक चुटकी इलायची और कुछ नीबू के रस की बूंदे डालिए। इस सिरप का दिन में 2 बार सेवन करें। आपको खांसी-जुकाम से काफी राहत मिलेगी। गर्म पानी - जितना हो सके गर्म पानी पिएं। आपके गले में जमा कफ खुलेगा और आप सुधार महसूस करेंगे। हल्दी वाला दूध - बचपन में सर्दियों में नानी-दादी घर के बच्चों को सर्दी के मौसम में रोज हल्दी वाला दूध पीने के लिए देती थी। हल्दी वाला दूध जुकाम में काफी फायदेमंद होता है क्योंकि हल्दी में एंटीआॅक्सीडेंट्स होते हैं जो कीटाणुओं से हमारी रक्षा करते हैं। रात को सोने से पहले इसे पीने से तेजी से आराम पहुचता है. हल्दी में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल प्राॅपर्टीज मौजूद रहती है...

संख्याओं का जादू

आंकडे झुंठ के तन्तु है, ये रोग के रोगियों की तरह है। ये किसी भी पक्ष का समर्थन कर सकते हैं। दो विपरीत पक्षों के ओर की बातों को प्रमाणित कर सकते हैं। समंक कुछ भी सिद्ध कर सकते हैं। समंक जो तथ्य स्पष्ट करते है वह सामान्य हो सकते है परन्तु जो तथ्य छिपाते हैं वह महत्वपूर्ण हो सकते है। समंक तथ्यों की परिभाषा को परिवर्तित कर सकते हैं। समंक तथ्यों को अस्पष्ट बना सकते हैं। कपटी, बेईमान, स्वार्थी व्यक्तियों द्वारा भ्रम में डालने एवं उद्देश्य से भटकाने के लिए समंको का उपयोग किया जा सकता है। अज्ञानी प्रयोगकर्ता द्वारा समंको की अनुपयुक्त तुलना कर समंको की विशेषताओं की उपेक्षा की जा सकती है। समंक संरचना समंक सांख्यिकी के आधारभूत तत्व हैं। ये विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं। समंकों को निम्न आधार पर वर्गीकृत किया गया गया हैं। स्त्रोंतों के आधार पर समंक स्त्रोंतो के आधार पर समंको को दो भागों में बांटा गया हैं। प्राथमिक समंक:- ऐसे समंक जो अनुसंधानकर्ता द्वारा नये सिरे से प्रारम्भ से अन्त तक एकत्रित किये जाते हैं। प्राथमिक समंक कहलाते हैं। इसमें अनुसंधानकर्ता मौलिक आधार पर समंक संग्रहित करता है। जैसे राजस...

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ छोटे और सीमान्त किसानों को (2 हेक्टेयर (4.9 एकड़) से कम भूमि) न्यूनतम आय हेतु प्रति वर्ष 6 हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान करती है। यह योजना माह दिसम्बर 2018 से लागू होगी। ₹ 6,000 प्रति वर्ष प्रत्येक पात्र किसान को तीन किश्तों में भुगतान प्राप्त होगा, जो कि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कराया जायेगा। इस योजना की शुरुआत वर्ष 2018 के रबी सीजन से हुई है। छोटे किसानों के आर्थिक एवं व्यावसायिक विकास को मध्यनजर रखते हुए अत्यन्त उपयोगी है। इस योजना के माध्यम से बुवाई के समय नगद संकट से जूझने वाले किसानों को बीज, खाद और अन्य इनपुट की उपलब्धता में सहूलियत मिल जाएगी। इन छोटे किसानों में ज्यादातर सीमान्त कृषक है व जिनका कृषि के अतिरिक्त कोई अन्य आय का साधन नहीं है। इस योजना का लाभ दो हेक्टेयर खेती वाली जमीन से कम रकबा वाले किसानों को दिए जाने का प्रावधान है। राज्य सरकारें ऐसे किसानों की जोत के साथ उनके बैंक खाते और अन्य ब्यौरा केंद्र सरकार को मुहैया कराएंगी। उसकी पुष्टि के बाद केन्द्र सरकार ऐसे किसान...

एक सनातन राष्ट्र - भारत

‘भारत’ का नामकरण शब्द की व्युत्पत्ति ‘विश्व का भरण पोषण करने में समर्थ देश’ होने से हुआ है। प्राचीन काल में इण्डोनेशिया से पश्चिम में ईरान  तक के भू-भाग में अतीत में एक साझी संस्कृति पर आधारित हिन्दू जीवन पद्धति प्रचलित रही है। कनिष्क के काल में ‘त्रिविष्टप‘ अर्थात तिब्बत व सिंकियांग  सहित वर्तमान भारत से अफगानिस्तान व मध्य एशियाई देशों तक यह भाग एक भू-राजनैतिक इकाई रहा है। चोल राज राजेन्द्र के काल में 1000 वर्ष पूर्व उनका राज्य सम्पूर्ण श्रीलंका व दक्षिण पूर्व एशिया तक रहा है इण्डोनेशिया में जावा व कम्बोडिया से लेकर अफगानिस्तान पर्यन्त इस सम्पूर्ण भू-भाग में आज  भी अनगिनत भव्य प्राचीन मन्दिर अथवा उनके अवशेष प्रचुरता में हैं। इस प्रकार इण्डोनेशिया से सम्पूर्ण वर्तमान भारत वर्ष सहित ईरान तक की इस एक प्राचीन भू-सांस्कृतिक समानता वाली इकाई के अनेक विभाजनों के बाद भी वर्तमान शेष भारत में भी विश्व की सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि (18 करोड़ हैक्टैर) व  आज देश में वर्षाकाल में बिना उपयोग के 20 करोड़ हैक्टैर मीटर की जो जल राशि बहकर चली जाती है, उसका उपयोग करके देश में 16 करोड़ हैक्ट...

आस्था, अंधविश्वास और अवधारणाएं

हमारे समाजिक जीवन में बहुत सी अवधारणाएं है। कुछ अवधारणाएं बेतुकी होती है, जो कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तर्कहीन होती है। जैसे कि जूते-चप्पल उल्टे हो जाने पर किसी से लड़ाई-झगड़ा होने की सम्भावना, अच्छे व बुरे सपने आने के संकेत। ऐसी अवधारणाए/मान्यताएं वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित नहीं होती। ऐसी मान्यताएं व्यवहारिक जीवन में सहज ही स्वीकार कर ली जाती है। बिना किसी सोच-विचार के ऐसी मान्यताओं पर विष्वास करना ही अंधविष्वास कहलाता है। कुछ लोगों के लिए तो यह आस्था के रूप में होती है। भारत में अधिकांष जनता अंधविष्वासी बनी हुई है। हम वास्तविक सत्य को नहीं जानते इसलिए अंधविश्वासों के कारण वहम परस्त एवं निर्णयहीन बन जाते है। ऐसे लोग अंधविश्वास को स्वीकार कर लेते है वे सदैव अपना जीवन डर के सायें व्यतीत करते है। परन्तु कुछ ऐसे लोग भी है जो अंधविष्वास को नहीं मानते ऐसे लोग साहसी लोग अपनी बुद्धि और समझ पर भरोसा करते हैं। ऐसे लोग भी है जिन्होंने किसी एक को अपना ईष्ट बना रखा है चाहे वह हनुमानजी हो या कालिका माता, राम हो या कृष्ण, शिव हो या विष्णु। कुछ मान्यताएं लोक-परंपरा और स्थानीय लोगों के अनुभवों ...

पिता का एक अहसास...

हम सभी जीवन में मौजूद प्रत्येक चीज का ज्ञान लेना चाहते है। प्रत्येक वस्तु का अर्थ एवं परिभाषा का ज्ञान करना चाहते है, उसके महत्व, गुण, दोष और विशेषताओं को जानना चाहते है। भारतीय संस्कृति के प्रभाव से कुछ तत्वों को केवल भावनाओं से जोडा जा सकता हैं। जैसे प्रेम भाव, दुःख भाव, खुशी भाव। पिता हमारे जीवन का एक अभिन्न महान व्यक्ति है। वह हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपने सपनो भुला देता है। पिता वो छत्र होता है जिसके साये में बचपन से ले कर जवानी के बेपरवाह दिन बड़े मौज से बिना किसी खौफ और सिकन के गुजरा करते थे। पिता की एक बात हो तो बताऊं कि उन पर इस बात के लिये गर्व कर सकते हैं और बाकी बातों के लिये नहीं। असल मे अगर आप संतान की दृष्टि से देखें तो मालूम होगा कि एक पिता अपनी संतान के लिये क्या कुछ नही सहन करता। कविता संग्रह - (1) ईश्वर का वरदान पिताजी, घर घर का सम्मान पिताजी दादी मां के बूढ़े होटों की मीठी मुस्कान पिताजी। अक्सर सामर्थ्यों से ज्यादा, रखते सब का मान पिताजी। जाने कैसे कब क्या होना, रखते इसका ध्यान पिताजी। पिता बन चुके बच्चों की भी, जग में हैं पहचान पिताजी। बच्चों ...

गुरु पूर्णिमा - आषाढ़ मास की पूर्णिमा

भारतीय संस्कृति में जीवन में शिक्षा के माध्यम से विकास करने हेतु गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। गुरु के आशिर्वाद, उनके सन्निधि एवं प्रवचन और अनुग्रह प्राप्त करने वाला जीवन कृतार्थता से भर जाता है। क्योंकि गुरु आत्म और परमात्मा दोनो के दर्शन कराता है। गुरू की प्रेरणा से आत्मा चैतन्यमय होती है। भवसागर पार पाने में गुरु नाविक की समान हैं। वे ही हितचिंतक, मार्गदर्शक, विकास प्रेरक एवं विघ्नविनाशक हैं। उनका जीवन शिष्य के लिये आदर्श बनता है। उनकी सीख जीवन का उद्देश्य बनती है। अनुभवी आचार्यों ने भी गुरु की महत्ता का प्रतिपादन करते हुए लिखा है- गुरु यानी वह अर्हता जो अंधकार में दीप, समुद्र में द्वीप, मरुस्थल में वृक्ष और हिमखण्डों के बीच अग्नि की उपमा को सार्थकता प्रदान कर सके। आषाढ़ मास की पूर्णिमा - गुरु पूर्णिमा गुरू पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है। भारतीय मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा का अर्थ है वर्षा ऋतु का आरम्भ होना है। इस दिन से चार महीने तक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अ...

जगन्नाथ मंदिर - कृष्ण बलराम और बहन सुभद्रा के साथ प्रतिष्ठित

 जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा के पुरी में स्थित कृष्ण अपने बड़े भ्राता बलराम और छोटी बहन सुभद्रा के साथ प्रतिष्ठित है। गोल आंखों वाले कृष्ण कालिख जितने काले है, बलराम श्वेत और सुभद्रा हल्दी जैसे पीले रंग में रंगी हैं। एक हजार साल पुराने किसी मंदिर के गर्भगृह की कल्पना कीजिए जो लोगों से भरा है। दीयों की राशनी और कपूर की महक से भरपूर इस गर्भगृह में मंच पर रखी लकड़ी की तीन विशाल मूर्तिया आपको देखे जा रही है। यह उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर का नजारा है, जहां कृश्ण अपने बड़े भाई बलराम और छोटी बहन सुभद्रा के साथ प्रतिश्ठापित है। गोल आंखो वाले कृश्ण कालिस जितने काले है, बलराम श्वेत, जबकि सुभद्र हल्दी जैसे पीले रंग की। उनकी प्रतिमाएं थेड़ी अजीब सी दिखती है। उन्हें कुरूप भी कह सकते है। कहते हैं कि महाभारत युद्ध के छत्तीस साल बाद जारा नामक शिकारी के तीर की वजह से कृश्ण अपना नश्वर शरीर छोड़कर बैकुंठ सिधार गये। बड़ी अनिच्छा से उनके अवशेशों का अंतिम संस्कार किया गया। उनके हृदय को छोड़कर्र अिन ने संपूर्ण शरीर को भस्म कर दिया। हृदय को समुद्र को अर्पित किया गया जो बाद में नीलमाधव नामक सु...

वेदान्त के सुप्रसिद्ध और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद

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जीवन परिचय - सर्वप्रथम मैं वेदान्त के सुप्रसिद्ध और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन करता हूं। स्वामीजी कलकत्ता ने बंगाली कायस्थ परिवार में जन्म लिया। स्वामी विवेकानन्द का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। स्वामीजी, रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य थे। गुरु रामकृष्ण देव से सीखा कि समस्त जीवो मे स्वयं परमात्मा का वास है। उन्होंने षिक्षा ग्रहण की कि जो मानव जरूरतमंदो की सेवा/सहायता करता है, उससे वास्तव परमात्मा की सेवा की जाती है। वर्ष 1783 में अमेरिका स्थित शिकागो एक विश्व धर्म महासभा का आयोजन किया गया था। जिसमें भारत के सनातन धर्म को प्रस्तुत करने हेतु स्वामीजी प्रतिनिधित्व किया। अमेरिका से लेकर यूरोप तक कई देषो में स्वामीजी ने आध्यात्मिकता और वेदान्त दर्शन का प्रचार प्रसार किया। उन्हें 2 मिनट का समय दिया गया जिसमें उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनो के साथ किया। उनके इस संबोधन ने सबका मन को जीता। देशभक्त संन्यासी के रूप में स्वामी विवेकानंदजी भारत में स्वामी विवेकानंदजी एक देशभक्त संन्यासी के रूप में जाने...

मील का पत्थर

मील का पत्थर छोटी मगर रोचक जानकारी हम और आप अपने जीवन में प्रतिदिन यात्रा करते ही रहते हैं। यात्रा करते समय हम देखते है कि सड़क के किनारे विभिन्न रंगों के ऐसे पत्थर सडक के साईड में लगे होते है और उन पर कुछ अंकित होता है। तो क्या आपने कभी सोचा है ये पत्थर क्यों लगाये जाते हैं A क्या विभिन्न रंगों को प्रयोग करना मील के पत्थर को सुंदर बनाने के लिए किया जाता है मील के पत्थर के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न रंग वास्तव में कलर कोड होते हैं। वास्तव मे कलर कोड सड़क और राजमार्ग को प्रदर्शित करते हैं , जिस पर आप यात्रा कर रहे हैं। तो आईए जानते है अलग अलग रंगों के पत्थरों का क्या कोड / औचित्य होता है। पीला सफेद रंग का पत्थर & यात्रा के समय यदि आपको पीले - सफेद रंग का पत्थर दिखाई देता है तो इसका अर्थ है कि आप राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर कर रहे हैं। हरा - सफेद रंग का पत्थर यात्रा करते समय यदि आप मील के पत्थर पर हरे र...