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जगन्नाथ मंदिर पुरी का इतिहास | भगवान कृष्ण, बलराम और सुभद्रा की अद्भुत कथा

जगन्नाथ मंदिर पुरी का इतिहास और रहस्य भारत के ओडिशा राज्य के पुरी शहर में स्थित जगन्नाथ मंदिर हिन्दू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर भगवान कृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा को समर्पित है। जगन्नाथ मंदिर कहाँ स्थित है? जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी शहर में स्थित है और यह चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। भगवान जगन्नाथ की मूर्तियों का रहस्य इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित लकड़ी की मूर्तियां हैं। भगवान कृष्ण को काले रंग में, बलराम को सफेद रंग में और सुभद्रा को पीले रंग में दर्शाया गया है। इन मूर्तियों की खासियत यह है कि इनके हाथ-पैर पूरी तरह नहीं बने हैं, जो इन्हें अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। जगन्नाथ मंदिर की पौराणिक कथा कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने अपना शरीर त्याग दिया। उनके हृदय को समुद्र में प्रवाहित किया गया, जो बाद में नीलमाधव के रूप में प्रकट हुआ। राजा इंद्रद्युम्न ने नीलमाधव की स्थापना के लिए मंदिर बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक दिव्य लकड़...

वेदान्त के सुप्रसिद्ध और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद

जीवन परिचय - सर्वप्रथम मैं वेदान्त के सुप्रसिद्ध और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन करता हूं। स्वामीजी कलकत्ता ने बंगाली कायस्थ परिवार में जन्म लिया। स्वामी विवेकानन्द का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। स्वामीजी, रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य थे। गुरु रामकृष्ण देव से सीखा कि समस्त जीवो मे स्वयं परमात्मा का वास है। उन्होंने षिक्षा ग्रहण की कि जो मानव जरूरतमंदो की सेवा/सहायता करता है, उससे वास्तव परमात्मा की सेवा की जाती है। वर्ष 1783 में अमेरिका स्थित शिकागो एक विश्व धर्म महासभा का आयोजन किया गया था। जिसमें भारत के सनातन धर्म को प्रस्तुत करने हेतु स्वामीजी प्रतिनिधित्व किया। अमेरिका से लेकर यूरोप तक कई देषो में स्वामीजी ने आध्यात्मिकता और वेदान्त दर्शन का प्रचार प्रसार किया। उन्हें 2 मिनट का समय दिया गया जिसमें उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनो के साथ किया। उनके इस संबोधन ने सबका मन को जीता। देशभक्त संन्यासी के रूप में स्वामी विवेकानंदजी भारत में स्वामी विवेकानंदजी एक देशभक्त संन्यासी के रूप में जाने...